क्या वित्त मंत्री ने लागत मूल्य पर किसानों | Kisano ki durdasa
वित्त मंत्री ने साफ-साफ कहा है कि रबी की अधिकांश फसलों का मूल्य लागत से डेढ़ गुना तय किया जा चुका है. अगर आप गणित में मेरी तरह फेल भी होते रहे होंगे तो भी समझ सकते हैं कि लागत का डेढ़ गुना दाम नहीं दिया जा रहा है. क्या वित्त मंत्री ने जो कहा वह सही है?
फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया गेंहू की ख़रीद करता है. इसकी साइट पर लिखा है कि 2014-15 में एक क्विंटल गेहूं की लागत थी 2015 रुपये, 2015-16 में 2127 और 2017-18 में 2408 रुपये. कभी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य ज़्यादा नहीं मिला. मार्च अप्रैल में गेहूं की कटाई होगी. शायद तब दाम का पता चले. खरीफ का अभी दूर है. न्यूतनम समर्थन मूल्य भी सिर्फ 6 से 7 फीसदी किसानों को ही मिलता है, सबको नहीं मिलता है. सरकार ने कहा है कि नीति आयोग, राज्य सरकारें मिलकर एक तंत्र बनाएंगी, उसका स्वरूप क्या होगा, यह देखना होगा.
दस करोड़ परिवारों को पांच लाख तक का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा. इसके लिए अभी 2000 करोड़ का ही प्रावधान किया गया है. इतने बड़े स्तर पर बीमा राशि का प्रीमियम कुछ लाख करोड़ का हो जाएगा, वो पैसा कौन देगा? सरकार नए अस्पताल खोलने की बात कर रही है. एम्स जितने खुले उनका ही पता नहीं है. दस पंद्रह साल से एम्स का ऐलान हर बजट का आकर्षण रहा है. शायद यह पहला बजट है जब एम्स का ऐलान नहीं हुआ है. हर तीन संसदीय क्षेत्रों के बीच एक अस्पताल खुलेगा, यह जब तक खुलेगा तब तक सपना खूब दिखाएगा. जो ज़िला अस्तपाल हैं, उन्हीं को भर्ती लायक बना दिया जाए तो जीवन आसान हो जाए. इन्हीं अस्पतालों के लिए डॉक्टर नहीं हैं. सरकार को मेडिकल की सीट बढ़ानी चाहिए थी और एमडी की सीट भी. इसके बिना डॉक्टर, डॉक्टर नहीं रहता.
फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया गेंहू की ख़रीद करता है. इसकी साइट पर लिखा है कि 2014-15 में एक क्विंटल गेहूं की लागत थी 2015 रुपये, 2015-16 में 2127 और 2017-18 में 2408 रुपये. कभी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य ज़्यादा नहीं मिला. मार्च अप्रैल में गेहूं की कटाई होगी. शायद तब दाम का पता चले. खरीफ का अभी दूर है. न्यूतनम समर्थन मूल्य भी सिर्फ 6 से 7 फीसदी किसानों को ही मिलता है, सबको नहीं मिलता है. सरकार ने कहा है कि नीति आयोग, राज्य सरकारें मिलकर एक तंत्र बनाएंगी, उसका स्वरूप क्या होगा, यह देखना होगा.
दस करोड़ परिवारों को पांच लाख तक का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा. इसके लिए अभी 2000 करोड़ का ही प्रावधान किया गया है. इतने बड़े स्तर पर बीमा राशि का प्रीमियम कुछ लाख करोड़ का हो जाएगा, वो पैसा कौन देगा? सरकार नए अस्पताल खोलने की बात कर रही है. एम्स जितने खुले उनका ही पता नहीं है. दस पंद्रह साल से एम्स का ऐलान हर बजट का आकर्षण रहा है. शायद यह पहला बजट है जब एम्स का ऐलान नहीं हुआ है. हर तीन संसदीय क्षेत्रों के बीच एक अस्पताल खुलेगा, यह जब तक खुलेगा तब तक सपना खूब दिखाएगा. जो ज़िला अस्तपाल हैं, उन्हीं को भर्ती लायक बना दिया जाए तो जीवन आसान हो जाए. इन्हीं अस्पतालों के लिए डॉक्टर नहीं हैं. सरकार को मेडिकल की सीट बढ़ानी चाहिए थी और एमडी की सीट भी. इसके बिना डॉक्टर, डॉक्टर नहीं रहता.

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